






प्रथम सप्तनाथ परिक्रमा और नाथ नगरी बरेली का नामकरण
नाथ नगरी बरेली
शिवभक्त संतोष कुमार उपाध्याय ने शिवसेना जिलाप्रमुख, बरेली के पद पर रहते अपनी पुत्री ऐश्वर्या उपाध्याय के 5वे जन्मदिवस 17 जून, 2007 को शिवसैनिको के साथ बरेली का नाम और इतिहास बदलने के उद्देश्य से अलखनाथ मंदिर से पैदल ही पहली सप्तनाथ परिक्रमा प्रारम्भ की थी। इससे पहले संतोष कुमार उपाध्याय अपने लैटर हेड पर बरेलीनाथ का प्रयोग करते थे । जब परिक्रमा अलखनाथ से मणिनाथ की ओर हर-हर महादेव के जयघोषों के साथ बड़ रही थी उसी बीच बरेली शिवसेना के जिला उप प्रमुख सुनील कुमार सक्सेना 'मिलन' और शिवसेना जिला प्रवक्ता - दिवाकर आर्य ने संतोष कुमार उपाध्याय को सलाह दी कि बरेली नाथ का नाम बदलकर नाथ नगरी बरेली कर दिया जाए। तुरंत ही दोनों नेताओं की सलाह को मानते हुए प्रथम नाथ नगरी बरेली का उदघोष मणिनाथ मंदिर पर किया गया उसी दिन से शिवभक्तो और शिवसेना ने बरेली को नाथनगरी बरेली के नाम से पुकारा। शिवसैनिक और शिवभक्त उसी दिन से हर वर्ष सावन में सप्तनाथों की परिक्रमा करते हैं। यह प्रथम परिक्रमा धार्मिक हथियारों के साथ सभी नाथो की परिक्रमा कर पूर्ण की गयी।
चूँकि उस समय देश में स्वतन्त्रता वर्ष की 50 वीं वर्षगांठ मनाई जा रही थी। इसलिए यात्रा को राष्ट्रवादी तरह से आगे बढ़ाते हुये सातो नाथों के भगवान शिव से भारत देश की सुख, समृद्धि और दुनिया में भारत की विकसित देशों मे गिनती की प्रार्थना की गई। पहली परिक्रमा पूरी तरह राष्ट्र को समर्पित थी |
जब प्रथम सप्तनाथ परिक्रमा की घोषणा जिलाप्रमुख संतोष कुमार उपाध्याय ने की तब प्रशासन ने इसे रोकने के लिये हर संभव प्रयास किया। नई प्रथा को रोकने के लिये तत्कालीन जिलाधिकारी देवराज जी सख्त हुये थे। परन्तु स्थानीय गुप्तचर अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जिलाधिकारी महोदय मान गये परन्तु जिलाधिकारी ने परिक्रमा में धार्मिक हथियारों को साथ लेकर चलने पर रोक लगा दी। परिक्रमा को भारी पुलिस बल के साथ पूर्ण सुरक्षा दी गयी।
परिक्रमा प्रारम्भ होते समय 467 शिवसैनिक थे। परिक्रमा लम्बी होने और पैदल होने के कारण पुन: अलखनाथ पहुँचते पहुंचते मात्र 76 शिवसैनिक ही परिक्रमा करने में सफल रहे।संयोगवश सरकार द्वारा घोषित नाथ नगरी बरेली का सप्तनाथ परिक्रमा मार्ग संतोष उपाध्याय जी के घर से होकर ही जा रहा है।उपर्युक्त परिक्रमा को दैनिक जागरण समाचार पत्र ने दिनांक 18 जून , 2007 को प्रमुखता से छापा था।इस समय संतोष उपाध्याय भगवा परिषद तथा भगवा सेवा समिति संगठनों से जुड़े है।
संतोष कुमार उपाध्याय का निवास सप्तनाथ परिक्रमा मार्ग पर ही बालाजी हाउस, होली-चौक, शांतिविहार कालोनी बदायूँ रोड , नाथनगरी बरेली में स्थित है। यह बदायूँ रोड पर स्थित ग्राम भमोरा के मूल निवासी है। उनके पिता रामप्रसाद शर्मा बरेली इंटर कॉलेज में शिक्षक थे। माता लालीवती श्रोत्रिय वराथानपुर निवासी थी। यह एक गृहिणी और धार्मिक महिला थी। संतोष उपाध्याय जी के जीवन पर माता का धार्मिक प्रभाव अधिक रहा। इनकी पत्नी रंजना शर्मा गृहिणी है । इनके दो बच्चे पुत्र दीपांकुर उपाध्याय तथा पुत्री ऐश्वर्या उपाध्याय हैं। उनकी तीन बहने अनीता, सुनीता व नीलम है जो सभी शादीशुदा है। संतोष उपाध्याय जी शहर में स्थित माध्यमिक विद्यालय मे विज्ञान / गणित के शिक्षक है।













